भारत ही नहीं वरन विश्व साहित्य में मुँशी प्रेमचंद जी का एक अलग स्थान है, और बना रहेगा | शायद ही कोई ऐसा साहित्य प्रेमी होगा, जिसने मुँशी प्रेमचंद जी को न पढ़ा हो | शायद अब उनके बारे में कुछ और कहने को बचा ही नहीं है| वो एक महान साहित्यकार ही नहीं, एक महान दार्शनिक भी थे | मेरी तरफ से उस महान कलम के सिपाही को एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित यह ब्लॉग, जिसमे मैं उनके अमूल्य साहित्य में से उनके कुछ महान विचार प्रस्तुत करूँगा........

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अक्तूबर 12, 2011

साक्षी


"जनता के फैसले साक्षी नहीं खोजते, अनुमान ही उसके लिए सबसे बड़ी गवाही है"

- मुँशी प्रेमचंद 

8 टिप्‍पणियां:

  1. जनता के फैसले ही तय करते हैं कि हुकूमत कौन करेगा.. जनता में एक ताकत तो है वह अनुमान हो या कोई और...

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  2. anumaan ko anumaan kar lena ..sabse bada faisla hota hai ...sacchi baat..

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  3. प्रेमचंद ने उत्तम बात कही है पर मेरा अनुरोध है कि आप स्वयं अपनी कलम से चंद पंक्तियों में इसको विस्तारित करते तो हमें समझने में आसानी होती.

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...