भारत ही नहीं वरन विश्व साहित्य में मुँशी प्रेमचंद जी का एक अलग स्थान है, और बना रहेगा | शायद ही कोई ऐसा साहित्य प्रेमी होगा, जिसने मुँशी प्रेमचंद जी को न पढ़ा हो | शायद अब उनके बारे में कुछ और कहने को बचा ही नहीं है| वो एक महान साहित्यकार ही नहीं, एक महान दार्शनिक भी थे | मेरी तरफ से उस महान कलम के सिपाही को एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित यह ब्लॉग, जिसमे मैं उनके अमूल्य साहित्य में से उनके कुछ महान विचार प्रस्तुत करूँगा........

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जनवरी 07, 2011

हार - जीत

"हानि, लाभ, जीवन, मरण, यश, अपयश विधि के हाथ है, हम तो खाली मैदान में खेलने के लिए बनाये गए हैं| सभी खिलाड़ी मन लगाकर खेलते हैं ; सभी चाहते हैं की हमारी जीत हो| 

लेकिन जीत एक ही की होती है , तो क्या इससे हारने वाले हिम्मत हार जाते हैं? वह फिर खेलते हैं, फिर हार जाते हैं, तो फिर खेलते हैं| कभी  न कभी तो उनकी जीत होती ही है| "
                                                                                             
                                                                                    - मुँशी प्रेमचंद 

4 टिप्‍पणियां:

  1. ... और इसी तरह चलता रहता है जीवन का क्रम कभी हार कभी जीत ! क्योंकि कर्म करने पर ही हमारा अधिकार है फल पर नहीं.

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...