भारत ही नहीं वरन विश्व साहित्य में मुँशी प्रेमचंद जी का एक अलग स्थान है, और बना रहेगा | शायद ही कोई ऐसा साहित्य प्रेमी होगा, जिसने मुँशी प्रेमचंद जी को न पढ़ा हो | शायद अब उनके बारे में कुछ और कहने को बचा ही नहीं है| वो एक महान साहित्यकार ही नहीं, एक महान दार्शनिक भी थे | मेरी तरफ से उस महान कलम के सिपाही को एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित यह ब्लॉग, जिसमे मैं उनके अमूल्य साहित्य में से उनके कुछ महान विचार प्रस्तुत करूँगा........

Click here for Myspace Layouts

जनवरी 29, 2011

धन का देवता



"धन का देवता आत्मा का बलिदान लिए बिना प्रसन्न नहीं होता|"

- मुँशी प्रेमचंद 

8 टिप्‍पणियां:

  1. इसीलिए तो माँ लक्ष्मी के साथ नारायण की भी पूजा का विधान है, लोग करते नहीं यह दूसरी बात है!

    उत्तर देंहटाएं
  2. इमरान भाई बहुत अच्छी बात बाते आपने...
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाकई ! जब तक आत्मा का हनन न किया जावे तब तक धनदेवता प्रसन्न नहीं हो पाते । शायद यही कारण है कि साहित्य के उपासक प्रायः विपन्नता में ही अपना अस्तित्व बनाते देखे जाते हैं ।
    मैंने इस ब्लाग के अगस्त 10 के पहले लेख में आपकी समर्थन से जुडी व्यथा भी देखी, क्या इसका एक कारण यह नहीं हो सकता कि आप स्वयं समर्थन करने के मुद्दे पर बेहद चूजी नजर आते हैं । sorry लेकिन मैंने आपमें ये बात प्रायः मार्क की है ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. @ सुशील जी,

    आपने कहा मैं समर्थन के मामले में चूज़ी हूँ.....जहाँ तक मुझे लगता है मैं अब तक चालीस से ऊपर ब्लॉगस का समर्थक हूँ.......पर हाँ मुझे राजनीतिक, धार्मिक, खबरों से सम्बंधित, मुद्दों पर संचालित ब्लॉग पसंद नहीं है......उसकी वजह है राजनीती में मुझे रूचि नहीं, धर्म उससे कहीं ऊपर है जिसे भीड़ मानती है, खबरे देखने के लिए टेलिविज़न, रेडियो, अखबार काफी चीज़े हैं और वहीँ नए मुद्दों पर बहुत कुछ मिलता है.......इसके अतरिक्त मैं किसी समूह का सदस्य नहीं ......तो जो मुझे पसंद आता है और मुझे लगता है आगे भी पसंद आएगा मैं उसका समर्थक हूँ......क्योंकि मेरी नज़र में समर्थक होने का मतलब है उस ब्लॉग पर आप हर बार जाएँ और हौसला बढ़ाते रहें......इसके अतरिक्त जो मुझे पसंद आता है मैं वहां अपनी टिप्पणी ज़रूर छोड़ता हूँ चाहें मैं उसका समर्थक हूँ या नहीं.....बाकी सब अपनी रूचि की बात है|

    रही बात मेरे ब्लॉग मुँशी प्रेमचंद पर अगस्त की मेरी पोस्ट की तो उसमे मैंने जो अपील की है वो उन महान लोगों को समर्पित ब्लॉग की है जिन्होंने साहित्य में या मानवता के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया.....जो मेरा लिखा नहीं मैं सिर्फ जरिया हूँ उस महान साहित्य के अंश मात्र को लोगों तक पहुँचाने का| और अगर ऐसा कोई ब्लॉग मेरी नज़र में आता है जो किसी महान आत्मा को समर्पित है तो निसंदेह मैं उसका समर्थक हूँ |

    उम्मीद करता हूँ की आप अन्यथा नहीं लेंगे......और आपसे एक आज्ञा चाहता हूँ की अगर मैं ये टिप्पणी आपकी टिप्पणी के साथ अपने ब्लॉग पर पोस्ट करना चाहूँ तो आपको कोई ऐतराज़ तो नहीं होगा|

    आप उम्र में मुझसे बड़े है....अगर कुछ गलत कह दिया हो तो माफ़ी चाहूँगा|

    उत्तर देंहटाएं
  5. इमरान भाई !
    बहुत ही प्रेरणा दायक विचार है !
    चुन चुन कर मोती लाना सबके बस की बात नहीं है ! कृपया मेरा आभार स्वीकार करें !

    उत्तर देंहटाएं

जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...