भारत ही नहीं वरन विश्व साहित्य में मुँशी प्रेमचंद जी का एक अलग स्थान है, और बना रहेगा | शायद ही कोई ऐसा साहित्य प्रेमी होगा, जिसने मुँशी प्रेमचंद जी को न पढ़ा हो | शायद अब उनके बारे में कुछ और कहने को बचा ही नहीं है| वो एक महान साहित्यकार ही नहीं, एक महान दार्शनिक भी थे | मेरी तरफ से उस महान कलम के सिपाही को एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित यह ब्लॉग, जिसमे मैं उनके अमूल्य साहित्य में से उनके कुछ महान विचार प्रस्तुत करूँगा........

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नवंबर 08, 2010

दरिद्र और दुर्बल


"संसार में दरिद्र और दुर्बल होना पाप है| इसकी सज़ा से कोई नहीं बच सकता| बाज़ कबूतर पर कभी दया नहीं करता|"
                                                                                 -  मुँशी प्रेमचंद 

4 टिप्‍पणियां:

  1. ये तो प्रकति का नियम है, दुर्बल हमेशा ही बलशाली के अन्याय से प्रताड़ित रहा है.....
    sparkindians.blogspot.com

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  2. सत्य है... आज के दौर में ज्यादा ही सत्य लगता है....

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  3. दरिद्र और दुर्बल होना पाप तो है पर ऐसे पापिओं को ऊपर उठाने के लिए हम क्या करते हैं ?.................

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  4. सही कहा है इसलिए हमें अपने भीतर बल और समृद्धि का खजाना भरते रहना चाहिए!

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...