भारत ही नहीं वरन विश्व साहित्य में मुँशी प्रेमचंद जी का एक अलग स्थान है, और बना रहेगा | शायद ही कोई ऐसा साहित्य प्रेमी होगा, जिसने मुँशी प्रेमचंद जी को न पढ़ा हो | शायद अब उनके बारे में कुछ और कहने को बचा ही नहीं है| वो एक महान साहित्यकार ही नहीं, एक महान दार्शनिक भी थे | मेरी तरफ से उस महान कलम के सिपाही को एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित यह ब्लॉग, जिसमे मैं उनके अमूल्य साहित्य में से उनके कुछ महान विचार प्रस्तुत करूँगा........

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अगस्त 17, 2011

न्याय


"न्याय करना उतना कठिन नहीं है, जितना की अन्याय का सामना करना"
                                                         
                    - मुँशी प्रेमचंद 

8 टिप्‍पणियां:

  1. न्याय करने में हम स्वार्थ से ऊपर उठते हैं और अन्याय का सामना करने में हमें अपनी आत्मा की शक्ति का प्रयोग करना होता है... वाकई यह कठिन कम है... सत्य वचन!

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...