भारत ही नहीं वरन विश्व साहित्य में मुँशी प्रेमचंद जी का एक अलग स्थान है, और बना रहेगा | शायद ही कोई ऐसा साहित्य प्रेमी होगा, जिसने मुँशी प्रेमचंद जी को न पढ़ा हो | शायद अब उनके बारे में कुछ और कहने को बचा ही नहीं है| वो एक महान साहित्यकार ही नहीं, एक महान दार्शनिक भी थे | मेरी तरफ से उस महान कलम के सिपाही को एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित यह ब्लॉग, जिसमे मैं उनके अमूल्य साहित्य में से उनके कुछ महान विचार प्रस्तुत करूँगा........
अक्टूबर 12, 2011
साक्षी
"जनता के फैसले साक्षी नहीं खोजते, अनुमान ही उसके लिए सबसे बड़ी गवाही है"
अनमोल वचन ..
जवाब देंहटाएंGahan Baat...
जवाब देंहटाएंसशक्त चित्रण..
जवाब देंहटाएंजनता के फैसले ही तय करते हैं कि हुकूमत कौन करेगा.. जनता में एक ताकत तो है वह अनुमान हो या कोई और...
जवाब देंहटाएंबहुत सही ...आभार ।
जवाब देंहटाएंanumaan ko anumaan kar lena ..sabse bada faisla hota hai ...sacchi baat..
जवाब देंहटाएंप्रेमचंद ने उत्तम बात कही है पर मेरा अनुरोध है कि आप स्वयं अपनी कलम से चंद पंक्तियों में इसको विस्तारित करते तो हमें समझने में आसानी होती.
जवाब देंहटाएंएकदम सही बात है।
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