भारत ही नहीं वरन विश्व साहित्य में मुँशी प्रेमचंद जी का एक अलग स्थान है, और बना रहेगा | शायद ही कोई ऐसा साहित्य प्रेमी होगा, जिसने मुँशी प्रेमचंद जी को न पढ़ा हो | शायद अब उनके बारे में कुछ और कहने को बचा ही नहीं है| वो एक महान साहित्यकार ही नहीं, एक महान दार्शनिक भी थे | मेरी तरफ से उस महान कलम के सिपाही को एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित यह ब्लॉग, जिसमे मैं उनके अमूल्य साहित्य में से उनके कुछ महान विचार प्रस्तुत करूँगा........

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नवंबर 29, 2011

घर


"घर", कितनी कोमल , पवित्र, मनोहर स्मृतियों को जाग्रत कर देता है| यह प्रेम का निवास-स्थान है | प्रेम ने बहुत तपस्या करके  यह वरदान पाया है | यही वह लहर है, जो मानव जीवन को स्थिर रखता है, उसे समुद्र की वेगवती लहरों में बहने और चट्टानों से टकराने से बचाता है | यही वह मंडप है, जो जीवन को समस्त विध्न - बाधाओं से सुरक्षित रखता है |
                                                                     - मुँशी प्रेमचंद  

नवंबर 15, 2011

समय



"समय की निंदा व्यर्थ और भूल है, यह मूर्खता और अदूरदर्शिता का फल है |"

- मुँशी प्रेमचंद 

अक्टूबर 29, 2011

सहानुभूति



"सहानुभूति वह दुर्लभ चाभी है, जिससे दूसरों के ह्रदय के अनसुलझे रहस्यों का ताला खोला जा सकता है"

- मुँशी प्रेमचंद 

अक्टूबर 12, 2011

साक्षी


"जनता के फैसले साक्षी नहीं खोजते, अनुमान ही उसके लिए सबसे बड़ी गवाही है"

- मुँशी प्रेमचंद 

सितंबर 20, 2011

अनंत ज्योति


"हमे जीवन इसलिए प्रदान किया गया है की सदविचारों और सत्कार्यों से उसे उन्नत करें और एक दिन अनंत ज्योति में विलीन हो जाएँ|"


                                                                - मुँशी प्रेमचंद